डोली पे बिठाने का वादा किया था जिन्होंने
बैसाखी पे चला रहे हैं देश को
और टिकठी पर नज़र है उनकी,
हमें उठाने होंगे कदम
देश मरणासन्न हो चला है !!
आदमी भूखा है आत्मा भी
पानी सूखा है हवा भी
आकाश झुका है ज़मीं भी
देश मरणासन्न हो चला है !!
जो ये काली रात न बीती तो इसके मायने
खोजेगा भविष्य के क्यों ,
नेकी में बदी ,और बदी में भला है
क्या देश मरणासन्न हो चला है ? !
- विकास सिंह
बैसाखी पे चला रहे हैं देश को
और टिकठी पर नज़र है उनकी,
हमें उठाने होंगे कदम
देश मरणासन्न हो चला है !!
आदमी भूखा है आत्मा भी
पानी सूखा है हवा भी
आकाश झुका है ज़मीं भी
देश मरणासन्न हो चला है !!
जो ये काली रात न बीती तो इसके मायने
खोजेगा भविष्य के क्यों ,
नेकी में बदी ,और बदी में भला है
क्या देश मरणासन्न हो चला है ? !
- विकास सिंह