आज कल की इस स्वार्थी दुनिया में लोग मानवता को बिलकुल भूल ही गए हैं.
अभी कुछ दिनों पहले एक मित्र के घर में एक दुर्घटना हो गयी बड़े भाई की मृत्यु एवं भाभी(प्रेमलता जी ,इलाहाबद) गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती हैं..और उन्हें ओ निगेटिव या ए निगेटिव रक्त की आवश्यकता थी.रात में पता चलते ही खोज चालू हो गयी क्यूंकि ये ग्रुप बहुत बहुत दुर्लभ ही मिलते हैं ,हम लोग हर उस व्यक्ति के पास गए जिसे जानते थे पर लोगों का कुछ ऐसा रूप दिखा के मानो मानवता को घोल के पी गए हों..
"हमारा है पर हम दे नहीं सकते "
"हमारी मम्मी ने मना किया है "
"हमें फलाना फलाना बीमारी है "
आधों को तो साफ़ बहाना मिल गया ये कह के "हमें तो ब्लड ग्रुप ही नहीं पता अपना "
कुछ स्वयंसेवकों को भी कॉल किया पर उनका जवाब तो एकदम सुभान अल्लाह था ..
"तुमको हमारा नंबर किसने दिया"
हमें खुद सोचना चाहिए की ये घटना हमारे साथ भी हो सकती है फिर आपके साथ कोई ऐसा करे तो कैसा लगेगा ..?
"अगर टूटे किसी का दिल तो शब् भर आँख रोटी है,
ये दुनिया है गुलों की जिसमे काटें पिरोती है .
हम अपने गाँव में मिलते हैं दुश्मन से भी इठला के ,
तुम्हारा शहर देखा तो तकलीफ होती है "
***मानवता को बचाइए..रक्तदान कीजिये !***
अभी कुछ दिनों पहले एक मित्र के घर में एक दुर्घटना हो गयी बड़े भाई की मृत्यु एवं भाभी(प्रेमलता जी ,इलाहाबद) गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती हैं..और उन्हें ओ निगेटिव या ए निगेटिव रक्त की आवश्यकता थी.रात में पता चलते ही खोज चालू हो गयी क्यूंकि ये ग्रुप बहुत बहुत दुर्लभ ही मिलते हैं ,हम लोग हर उस व्यक्ति के पास गए जिसे जानते थे पर लोगों का कुछ ऐसा रूप दिखा के मानो मानवता को घोल के पी गए हों..
"हमारा है पर हम दे नहीं सकते "
"हमारी मम्मी ने मना किया है "
"हमें फलाना फलाना बीमारी है "
आधों को तो साफ़ बहाना मिल गया ये कह के "हमें तो ब्लड ग्रुप ही नहीं पता अपना "
कुछ स्वयंसेवकों को भी कॉल किया पर उनका जवाब तो एकदम सुभान अल्लाह था ..
"तुमको हमारा नंबर किसने दिया"
हमें खुद सोचना चाहिए की ये घटना हमारे साथ भी हो सकती है फिर आपके साथ कोई ऐसा करे तो कैसा लगेगा ..?
"अगर टूटे किसी का दिल तो शब् भर आँख रोटी है,
ये दुनिया है गुलों की जिसमे काटें पिरोती है .
हम अपने गाँव में मिलते हैं दुश्मन से भी इठला के ,
तुम्हारा शहर देखा तो तकलीफ होती है "
***मानवता को बचाइए..रक्तदान कीजिये !***