Thursday, October 31, 2013

"हकीकत"

किसी को क़ाबा दिखा ,किसी को शिवाला दिखा,
मै भूखा था , मुझे निवाला दिखा !!

लोगों को मरहम लगाते नेता और बाबा दिखे,
मुझे तो बस बस्ती दिखी,जलाने वाला दिखा !!

उन्हें पैसा दिखा ,लुटाने वाला दिखा,
मुझे बूढ़े पाँव,और हाथों में छाला दिखा !!



लूटने आया था जो, उसमे उसे रखवाला दिखा,
मुझे तो बस हर नज़र में लुटता भोलाभाला दिखा !!


लुट चुका था वो उसे घना कोहरा ,और आकाश काला दिखा,
हारने वालों में से नहीं था मै, मुझे स्याह रात के बाद का उजाला दिखा !!


दुखों का समुन्दर चाहे कितना बड़ा हो, उसे,
पार करने वाला नन्हा पक्षी भी हिम्मतवाला दिखा !!