मूल्यों का वजन सिर्फ एक पे,
ये कैसा दर्शन ,विचार करना होगा...
लड़की समाज में सुरक्षित है के नहीं के साथ ही,
बिगड़ते बेटों की स्थिति में सुधार करना होगा !!
आदमी हाफ पेंट में माचो और
महिला बदन बेच रही है,
ये कैसा न्याय है के एक की स्वतंत्रता
अगले को बंदी साबित कर रही है ?
महिला चेतना की हाय तौबा मचने वाले
आज गला फाड़ फाड़ चिल्लाते हैं
के "उसके कपडे उसका शरीर"
ये "उनका" निजी फैसला "उनकी"
स्वतंत्रता है ,
और अगले दिन ये ही झंडाबरदार
सिनेमा में कम कपडे पे हाय तौबा मचाते हैं !!
भारतीय संस्कृति अगर कोई संजोता है
तो ये अच्छी बात है
पर अगर कोई बाहरी संस्कृति पिरोता है
तो क्या वो आदम जात नहीं ?
संस्कृति हर रूप में
समय के साथ बदलाव मांगती है
संस्कृति एक नदी है
रोक दिए जाने पर
गन्दा तालाब बन जाती है !!
:-विकास सिंह !!