Friday, November 8, 2013

"कटु सत्य "

ज़िन्दगी उधार सी लगती है , फिज़ा बीमार सी लगती है ,
धर्म ने जब से पहचान कराई है शहर में , इंसानियत लाचार सी लगती है !

ये पुजारी मौलवी व्यापारी धर्म के ,जनता ख़रीददार लगती है 
मंदिर मस्जिदों पर लाशें बिछ रही , दार-उल-सुकून बस मज़ार लगती है !!


-विकास

दार- उल-सुकून = PLACE OF PEACE !!