Monday, December 2, 2013
Friday, November 8, 2013
"कटु सत्य "
ज़िन्दगी उधार सी लगती है , फिज़ा बीमार सी लगती है ,
धर्म ने जब से पहचान कराई है शहर में , इंसानियत लाचार सी लगती है !
ये पुजारी मौलवी व्यापारी धर्म के ,जनता ख़रीददार लगती है
मंदिर मस्जिदों पर लाशें बिछ रही , दार-उल-सुकून बस मज़ार लगती है !!
-विकास
दार- उल-सुकून = PLACE OF PEACE !!
धर्म ने जब से पहचान कराई है शहर में , इंसानियत लाचार सी लगती है !
ये पुजारी मौलवी व्यापारी धर्म के ,जनता ख़रीददार लगती है
मंदिर मस्जिदों पर लाशें बिछ रही , दार-उल-सुकून बस मज़ार लगती है !!
-विकास
दार- उल-सुकून = PLACE OF PEACE !!
Thursday, October 31, 2013
"हकीकत"
किसी को क़ाबा दिखा ,किसी को शिवाला दिखा,
मै भूखा था , मुझे निवाला दिखा !!
लोगों को मरहम लगाते नेता और बाबा दिखे,
लोगों को मरहम लगाते नेता और बाबा दिखे,
मुझे तो बस बस्ती दिखी,जलाने वाला दिखा !!
उन्हें पैसा दिखा ,लुटाने वाला दिखा,
मुझे बूढ़े पाँव,और हाथों में छाला दिखा !!
लूटने आया था जो, उसमे उसे रखवाला दिखा,
मुझे तो बस हर नज़र में लुटता भोलाभाला दिखा !!
लुट चुका था वो उसे घना कोहरा ,और आकाश काला दिखा,
हारने वालों में से नहीं था मै, मुझे स्याह रात के बाद का उजाला दिखा !!
दुखों का समुन्दर चाहे कितना बड़ा हो, उसे,
पार करने वाला नन्हा पक्षी भी हिम्मतवाला दिखा !!
उन्हें पैसा दिखा ,लुटाने वाला दिखा,
मुझे बूढ़े पाँव,और हाथों में छाला दिखा !!
लूटने आया था जो, उसमे उसे रखवाला दिखा,
मुझे तो बस हर नज़र में लुटता भोलाभाला दिखा !!
लुट चुका था वो उसे घना कोहरा ,और आकाश काला दिखा,
हारने वालों में से नहीं था मै, मुझे स्याह रात के बाद का उजाला दिखा !!
दुखों का समुन्दर चाहे कितना बड़ा हो, उसे,
पार करने वाला नन्हा पक्षी भी हिम्मतवाला दिखा !!
Monday, July 1, 2013
"संकुचित संस्कृति "
मूल्यों का वजन सिर्फ एक पे,
ये कैसा दर्शन ,विचार करना होगा...
लड़की समाज में सुरक्षित है के नहीं के साथ ही,
बिगड़ते बेटों की स्थिति में सुधार करना होगा !!
आदमी हाफ पेंट में माचो और
महिला बदन बेच रही है,
ये कैसा न्याय है के एक की स्वतंत्रता
अगले को बंदी साबित कर रही है ?
महिला चेतना की हाय तौबा मचने वाले
आज गला फाड़ फाड़ चिल्लाते हैं
के "उसके कपडे उसका शरीर"
ये "उनका" निजी फैसला "उनकी"
स्वतंत्रता है ,
और अगले दिन ये ही झंडाबरदार
सिनेमा में कम कपडे पे हाय तौबा मचाते हैं !!
भारतीय संस्कृति अगर कोई संजोता है
तो ये अच्छी बात है
पर अगर कोई बाहरी संस्कृति पिरोता है
तो क्या वो आदम जात नहीं ?
संस्कृति हर रूप में
समय के साथ बदलाव मांगती है
संस्कृति एक नदी है
रोक दिए जाने पर
गन्दा तालाब बन जाती है !!
:-विकास सिंह !!
------रास्ते-----
"रौंदते हैं हम ,उन्हें
अपने क़दमों से ....
पर खोलते हैं वो दरवाजे ,
हमारे लिए !
बढ़ जाते हैं हम,अक्सर ,आगे
रास्ते रह जाते हैं वहीँ ...
औरों को बढाने के लिए ..आगे !
कोई , वापस आता है,कोई नहीं
कोई बदल जाता है , कोई नहीं
पर नहीं बदलते , ये रास्ते !"
-विकास !
आइना
"लाशें जल जायेंगी और मामले ठन्डे हो जायेंगे
तबाही फिर आएगी , और आइना दिखाएगी !"
हम नहीं सुधरेंगे !
हम भगवान को फिर से गरियायेंगे !
यही सरकार दुबारा बनवायेंगे ..
कोशिश रहेगी तबाही इस बार बड़ी मंगवाएंगे !!
(उत्तराखंड त्रासदी पर )
-विकास !
तबाही फिर आएगी , और आइना दिखाएगी !"
हम नहीं सुधरेंगे !
हम भगवान को फिर से गरियायेंगे !
यही सरकार दुबारा बनवायेंगे ..
कोशिश रहेगी तबाही इस बार बड़ी मंगवाएंगे !!
(उत्तराखंड त्रासदी पर )
-विकास !
Saturday, June 22, 2013
Monday, June 10, 2013
Tuesday, June 4, 2013
"मुबारक़ हो आपके घर "बीमारी" पैदा हुयी है "
मै मम्मी के साथ घर से निकला ही था की बगल वाली आंटी मिल गयी और पूछी और कैसे हो बेटा तबियत कैसी है अब?
मैंने कहा आंटी ठीक है बस हलकी सी खांसी थी १० रूपये के अदरख ने सही कर दिया !!
सुबह पता चला था कि पिंकू (उनका बेटा ) बीमार(जुकाम) है !! तो मैंने तपाक से पुछा और पिंकू ??
और ये बताने की बजाय के उसे क्या मर्ज़ है सीधें बोली २८०० की दवा लाये इसके पापा, डाक्टर साहेब कि फीस ही १००० थी !!
और उनकी इस पंक्ति का सीधा निशाना था " मेरी १० रूपये कि खांसी "!!
और उनके हिसाब से उनकी इस पंक्ति ने उनका स्टेटस थोडा ऊंचा कर दिया !!
समाज में किसी के दर्द से ऊपर उसपे खर्च की जाने वाली रकम आज कल आती है और लोग बड़े शान से बताते भी हैं ! मसलन अगर आप का मर्ज़ मात्र १०० रूपये में ठीक हो गया तो आप " बिलो पोवर्टी लाइन " में आते हैं !!
खैर , मेरी मम्मी के कानों में ये बात पड़ गयी थी ..." १००० फीस वाले डाक्टर सब ठीक कर देंगे ज़रूर "
और उसके बाद नजाने कितने डाक. साब लोग का जेब खर्चा मेरे पापा कि मेहनत कि कमाई से भरा गया
...और उससे भी ज्यादा उनकी द्वारा दी हुयी दवाइयों पे खर्च हुए !!
एक और कैटेगरी है " कुछ डाक्टर साब लोग जो सरकारी संस्थानों से जुड़े हैं वो फीस नहीं लेते ..बस उनके यहाँ से दवाइयां ले लीजिये आप (और लोगों कि नजर में वो महान हो जाते हैं ) !! और बैकुंठ में बैठे भगवान
की कसम फीस वाले डोक्टर से भी महंगे ये बिना फीस वाले सफेदपोश पड़ जाते हैं ,
दवाइयां इतनी महंगी की दो चार बीमारियाँ तो दवाइयों का दाम देख के लग जाती हैं ! और उस पर
से ये डॉक् साब लोग कोर्स कराते हैं , ४ हफ्ते का – ५ हफ्ते का ....मतलब जब तक
आपको जी भर के तफसील से १२ के भाव से लूट नहीं लेंगे आपको नहीं छोड़ेंगे ...कई बार
बिमारी सहना डोक्टर को सहने से ज्यादा ठीक लगता है !
एक दिन गुप्ता अंकल मिले कहने लगे कि वो सरकारी चिकित्सालय में काम करते हैं और सुबह जो डोक्टर साब बैठते हैं उनके यहाँ वो बड़े अच्छे डोक्टर हैं आप लोग कभी भी आ जाया करें ..खर्चा बस १ रूपये पर्ची का ...दवाई फ्री !
इसी मोहपाश में बंधे वहां भी पहुँच गए ... काफी देर बाद निर्मला देवी का नंबर आया फिर मेरी बारी थी ..मै गया ..और अभी बताना सही से शुरू भी नहीं किया था की डॉक् साब पर्ची बनाने लगे और जब अभी मै रस्ते पर २० % ही बढ़ा था की उन्होंने दवाइयों की लिस्ट सामने रख दी ..मन ही मन हमने कहा की “अमा सुन तो ल्यो, अभी मेन चीज़ तो बताबे नहीं किये और तुम लिख दियो “..हम पलट के कुछ कहे की कम्पाउन्डर आ गया ..पर्ची उठा के थमा दी और अगले को बुला कर चला गया !
यहाँ भी वही ...बात ...ढाक के तीन पात !
एक दिन गुप्ता अंकल मिले कहने लगे कि वो सरकारी चिकित्सालय में काम करते हैं और सुबह जो डोक्टर साब बैठते हैं उनके यहाँ वो बड़े अच्छे डोक्टर हैं आप लोग कभी भी आ जाया करें ..खर्चा बस १ रूपये पर्ची का ...दवाई फ्री !
इसी मोहपाश में बंधे वहां भी पहुँच गए ... काफी देर बाद निर्मला देवी का नंबर आया फिर मेरी बारी थी ..मै गया ..और अभी बताना सही से शुरू भी नहीं किया था की डॉक् साब पर्ची बनाने लगे और जब अभी मै रस्ते पर २० % ही बढ़ा था की उन्होंने दवाइयों की लिस्ट सामने रख दी ..मन ही मन हमने कहा की “अमा सुन तो ल्यो, अभी मेन चीज़ तो बताबे नहीं किये और तुम लिख दियो “..हम पलट के कुछ कहे की कम्पाउन्डर आ गया ..पर्ची उठा के थमा दी और अगले को बुला कर चला गया !
यहाँ भी वही ...बात ...ढाक के तीन पात !
तो लब्बो लुआब ये की ..भईया
इस काले कलयुग में आप गलती से भी किसी बीमारी की चपेट में आने से बचे ..क्यूंकि हो
सकता है आप का शरीर ठीक हो जाये ..पर फिर जेब बहुत दिनों तक बीमार पड़ सकती है ..और
“मनी है तो हनी है “ !
Monday, June 3, 2013
Thursday, May 2, 2013
हर नेकदिली के बदले उसने खौफ का मंजर दिखाया था,
फिर भी गले लगाया उसे जिसने खंजर दिखाया था
उसकी नीयत खराब थी ये तुम्हे भी पता था
और उसपर से उसे सर पे चढ़ाया था
देश हारा लोग हारे ,हर ईमान शरमाया था
देश की भावना को अपने कौड़ियों में लगाया था
वो आँख निकालता है आप तो बस दिखाते हो
६५ साल की इज्जत को हर पल गंवाते हो !!
:-विकास !
Wednesday, March 20, 2013
डोली पे बिठाने का वादा किया था जिन्होंने
बैसाखी पे चला रहे हैं देश को
और टिकठी पर नज़र है उनकी,
हमें उठाने होंगे कदम
देश मरणासन्न हो चला है !!
आदमी भूखा है आत्मा भी
पानी सूखा है हवा भी
आकाश झुका है ज़मीं भी
देश मरणासन्न हो चला है !!
जो ये काली रात न बीती तो इसके मायने
खोजेगा भविष्य के क्यों ,
नेकी में बदी ,और बदी में भला है
क्या देश मरणासन्न हो चला है ? !
- विकास सिंह
बैसाखी पे चला रहे हैं देश को
और टिकठी पर नज़र है उनकी,
हमें उठाने होंगे कदम
देश मरणासन्न हो चला है !!
आदमी भूखा है आत्मा भी
पानी सूखा है हवा भी
आकाश झुका है ज़मीं भी
देश मरणासन्न हो चला है !!
जो ये काली रात न बीती तो इसके मायने
खोजेगा भविष्य के क्यों ,
नेकी में बदी ,और बदी में भला है
क्या देश मरणासन्न हो चला है ? !
- विकास सिंह
Saturday, March 9, 2013
ना पाक हैं न शरीफ हैं ,
फिर भी मियां इस समय अजमेर शरीफ हैं ,
उनका आना हुआ , सलमान का खाना हुआ ,
दो बाते हुयी , कुछ फ़साना हुआ,
जाते जाते कह गए मिया अशरफ़
के कुछ गले और काट लायेंगे ..जो अबकी बार आना हुआ !!
सलमान ने मनाया और मिमियाते हुए समझाया
आप क्या तकल्लुफ लेते हैं मिया
जो दो तीन साल आप रुक लें
तो हम खुद ही भिजवा देंगे , तोहफे में
पूरा मुल्क , जो अबकी बार सरकार में आना हुआ !!
-- विकास सिंह !
फिर भी मियां इस समय अजमेर शरीफ हैं ,
उनका आना हुआ , सलमान का खाना हुआ ,
दो बाते हुयी , कुछ फ़साना हुआ,
जाते जाते कह गए मिया अशरफ़
के कुछ गले और काट लायेंगे ..जो अबकी बार आना हुआ !!
सलमान ने मनाया और मिमियाते हुए समझाया
आप क्या तकल्लुफ लेते हैं मिया
जो दो तीन साल आप रुक लें
तो हम खुद ही भिजवा देंगे , तोहफे में
पूरा मुल्क , जो अबकी बार सरकार में आना हुआ !!
-- विकास सिंह !
Saturday, February 16, 2013
"सियासत "
वाह
सियासत ,आह सियासत
देश की हर इक राह सियासत
दिन सियासत
रात सियासत
खाली
तो बिन बात सियासत
रंग
सियासत ढंग सियासत
लोकतंत्र
हर अंग सियासत
लहू
के हैं दो रंग सियासत
बदी
का है सत्संग सियासत
जमीदोज
है उनपे सियासत
सर
पे चढ़ें हैं उनपे सियासत
मई
सियासत जून सियासत
हर
गली हर खून सियासत
सज़ायाफ्ता
दिल पे सियासत
टूटी
हर मंज़िल पे सियासत
निकला हर एक सुर सियासत
निकला हर एक सुर सियासत
हर
कला हर गुण सियासत
कर्म सियासत धर्म सियासत
असुर है ये बेशर्म सियासत ..
हाय सियासत हाय सियासत !!
-विकास सिंह
असुर है ये बेशर्म सियासत ..
हाय सियासत हाय सियासत !!
-विकास सिंह
Monday, February 11, 2013
Saturday, February 2, 2013
Wednesday, January 30, 2013
हमारे गाँव में बहुत सालों से एक "धनुष्य यज्ञ" नाम का आयोजन होता है जिसमे सीता के स्वयंवर के समय हुए धनुष की प्रत्यंचा चढाने की कथा का मंचन होता है ..और तमाम राजा सीता के लिए अपना दावा बुलंद करने आते हैं और उसमे एक "गेस्ट अपीयरेन्स" के तौर एक राजा आते हैं जिन्हें "गदहवा राजा " कहा जाता है वो "गधे " पे बैठ के आते हैं !! जो ख़ास बात उनकी होती है वो ये के वो हर बात को कह के पलट जाते हैं और और सीधे सीधे गाली देके भोले बन जाते हैं ..अब आगे क्या कहूँ हर दिन एक न एक "गदहवा राजा " इस देश में पैदा हो जाता है ..कभी किसी "ओवैसी" के रूप में कभी "नंदी" तो कभी किसी "एस.आर.के " के रूप में !! कुल मिला के पब्लिक को ये बस ये सन्देश देना चाहते हैं की भाई हमको फॉलो करोगे तो तुम भी कहलाओगे "गधे "!!
Friday, January 25, 2013
कल २६ जनवरी है और इस दिन बहादुरी
पुरस्कार भी दिए जाते हैं !
मेरे हिसाब से कुछ और पैमाने भी होने चाहिए जो देश में एक व्यक्ति की बहादुरी को दर्शाए -
तुषार का अभिनय ,जेनेलिया का संवाद और रेशमिया का उन्माद जो झेल ले वो बहादुर !!
राहुल के प्रयास ,दिग्गी की बकवास और पाकिस्तान की मिठास जो झेल ले वो बहादुर !!
पानी का मिसयूज़,सेक्युलर नेताओं के व्यूज़ और इण्डिया टीवी की न्यूज़ जो झेल ले वो बहादुर !!
पुलिस का सच ,रामगोपाल वर्मा का टच,इमाम-डाली बिंद्रा की मचमच जो झेल ले वो बहादुर !!
भारत की रेल,नौकरी की ठेलमठेल और संधिसुधा का तेल जो झेल ले वो बहादुर !!
और समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार,महिलाओं पर अत्याचार और कांग्रेस की सरकार जो झेल ले वो ....
वो बहादुर नहीं वो कायर .....वो कायर !!
मेरे हिसाब से कुछ और पैमाने भी होने चाहिए जो देश में एक व्यक्ति की बहादुरी को दर्शाए -
तुषार का अभिनय ,जेनेलिया का संवाद और रेशमिया का उन्माद जो झेल ले वो बहादुर !!
राहुल के प्रयास ,दिग्गी की बकवास और पाकिस्तान की मिठास जो झेल ले वो बहादुर !!
पानी का मिसयूज़,सेक्युलर नेताओं के व्यूज़ और इण्डिया टीवी की न्यूज़ जो झेल ले वो बहादुर !!
पुलिस का सच ,रामगोपाल वर्मा का टच,इमाम-डाली बिंद्रा की मचमच जो झेल ले वो बहादुर !!
भारत की रेल,नौकरी की ठेलमठेल और संधिसुधा का तेल जो झेल ले वो बहादुर !!
और समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार,महिलाओं पर अत्याचार और कांग्रेस की सरकार जो झेल ले वो ....
वो बहादुर नहीं वो कायर .....वो कायर !!
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