हर नेकदिली के बदले उसने खौफ का मंजर दिखाया था,
फिर भी गले लगाया उसे जिसने खंजर दिखाया था
उसकी नीयत खराब थी ये तुम्हे भी पता था
और उसपर से उसे सर पे चढ़ाया था
देश हारा लोग हारे ,हर ईमान शरमाया था
देश की भावना को अपने कौड़ियों में लगाया था
वो आँख निकालता है आप तो बस दिखाते हो
६५ साल की इज्जत को हर पल गंवाते हो !!
:-विकास !
No comments:
Post a Comment