Tuesday, June 4, 2013

"मुबारक़ हो आपके घर "बीमारी" पैदा हुयी है "

मै  मम्मी के साथ घर से निकला ही था की बगल वाली आंटी मिल गयी और पूछी और कैसे हो बेटा तबियत कैसी है अब?
मैंने  कहा  आंटी  ठीक  है बस हलकी सी खांसी थी १० रूपये के अदरख ने सही कर दिया !!
सुबह  पता चला था कि पिंकू (उनका बेटा ) बीमार(जुकाम) है !! तो मैंने तपाक से पुछा और पिंकू ??
और ये बताने की बजाय के उसे क्या मर्ज़ है सीधें बोली २८०० की दवा लाये इसके पापा, डाक्टर साहेब कि फीस ही १००० थी   !!
और उनकी इस पंक्ति का सीधा निशाना था " मेरी १० रूपये कि खांसी  "!!
और उनके हिसाब से उनकी इस पंक्ति ने उनका स्टेटस थोडा ऊंचा कर दिया !!
समाज में किसी के दर्द से ऊपर उसपे खर्च की जाने वाली रकम आज कल आती है और लोग बड़े शान से बताते भी हैं ! मसलन अगर आप का मर्ज़ मात्र १०० रूपये में ठीक हो गया तो आप " बिलो पोवर्टी लाइन " में आते हैं !!
खैर , मेरी मम्मी के कानों में ये बात  पड़ गयी थी ..." १००० फीस वाले डाक्टर सब ठीक कर देंगे ज़रूर "
और उसके बाद नजाने कितने डाक. साब लोग का जेब  खर्चा मेरे पापा कि मेहनत कि कमाई से भरा  गया ...और उससे भी ज्यादा उनकी द्वारा दी हुयी दवाइयों पे खर्च हुए !!
एक और कैटेगरी है " कुछ डाक्टर साब लोग जो सरकारी संस्थानों से जुड़े हैं वो फीस नहीं लेते ..बस उनके यहाँ से दवाइयां ले लीजिये आप (और लोगों कि नजर में वो महान हो जाते हैं ) !! और बैकुंठ में बैठे भगवान की कसम फीस वाले डोक्टर से भी महंगे ये बिना फीस वाले सफेदपोश पड़ जाते हैं , दवाइयां इतनी महंगी की दो चार बीमारियाँ तो  दवाइयों का दाम देख के लग जाती हैं ! और उस पर से ये डॉक् साब लोग कोर्स कराते हैं , ४ हफ्ते का – ५ हफ्ते का ....मतलब जब तक आपको जी भर के तफसील से १२ के भाव से लूट नहीं लेंगे आपको नहीं छोड़ेंगे ...कई बार बिमारी सहना डोक्टर को सहने से ज्यादा ठीक लगता है !

एक दिन गुप्ता अंकल मिले कहने लगे कि वो सरकारी चिकित्सालय में काम करते हैं और सुबह जो डोक्टर साब बैठते हैं उनके यहाँ वो बड़े अच्छे डोक्टर हैं आप लोग कभी भी आ जाया करें ..खर्चा बस १ रूपये पर्ची का ...दवाई फ्री !
इसी मोहपाश में बंधे वहां भी पहुँच गए ... काफी देर बाद निर्मला देवी का नंबर आया फिर मेरी बारी थी ..मै गया ..और अभी बताना सही से शुरू भी नहीं किया था की डॉक् साब पर्ची बनाने लगे और जब अभी मै रस्ते पर २० % ही बढ़ा था की उन्होंने दवाइयों की लिस्ट सामने रख दी ..मन ही मन हमने कहा की “अमा सुन तो ल्यो, अभी मेन चीज़ तो बताबे नहीं किये और तुम लिख दियो  “..हम पलट के कुछ कहे की कम्पाउन्डर आ गया ..पर्ची उठा के थमा दी और अगले को बुला कर चला गया !
यहाँ भी वही ...बात ...ढाक के तीन पात !


तो लब्बो लुआब ये की ..भईया इस काले कलयुग में आप गलती से भी किसी बीमारी की चपेट में आने से बचे ..क्यूंकि हो सकता है आप का शरीर ठीक हो जाये ..पर फिर जेब बहुत दिनों तक बीमार पड़ सकती है ..और “मनी है तो हनी है “ !

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