Monday, July 1, 2013

------रास्ते-----


"रौंदते हैं हम ,उन्हें 

अपने क़दमों से ....
पर खोलते हैं वो दरवाजे ,
हमारे लिए !

बढ़ जाते हैं हम,अक्सर ,आगे 
रास्ते रह जाते हैं वहीँ ...
औरों को बढाने के लिए ..आगे !

कोई , वापस आता है,कोई नहीं 
कोई बदल जाता है , कोई नहीं 
पर नहीं बदलते , ये रास्ते !"

-
विकास !

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