ज़िन्दगी उधार सी लगती है , फिज़ा बीमार सी लगती है ,
धर्म ने जब से पहचान कराई है शहर में , इंसानियत लाचार सी लगती है !
ये पुजारी मौलवी व्यापारी धर्म के ,जनता ख़रीददार लगती है
मंदिर मस्जिदों पर लाशें बिछ रही , दार-उल-सुकून बस मज़ार लगती है !!
-विकास
दार- उल-सुकून = PLACE OF PEACE !!
धर्म ने जब से पहचान कराई है शहर में , इंसानियत लाचार सी लगती है !
ये पुजारी मौलवी व्यापारी धर्म के ,जनता ख़रीददार लगती है
मंदिर मस्जिदों पर लाशें बिछ रही , दार-उल-सुकून बस मज़ार लगती है !!
-विकास
दार- उल-सुकून = PLACE OF PEACE !!
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