Sunday, January 20, 2013

रात भर ठण्ड में कांपती रही वो बुढ़िया 
कल अपने बेटे को आंचल ओढाया था जिसने 
मैं साक्षी था उस दृश्य का 
एक माँ के दर्द का एहसास कराया था जिसने 
माँ की बातें माँ का प्यार 
माँ की ममता माँ का दुलार 
वो माँ ही थी, उसका जूठा, खाया था जिसने 
वो माँ ही थी उसे चलना सिखाया था जिसने 
उस माँ को उसने भुला दिया 
उसके निश्छल प्यार का ये सिला दिया 
के छाले भी पाँव के उसके नहीं सूखते ...!!
और उस बेटे के प्यार की इन्तहा देखिये 
उसकी माँ नहीं रोती...लोग उसे देख के रोते हैं !

-विकास सिंह 

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