रात भर ठण्ड में कांपती रही वो बुढ़िया
कल अपने बेटे को आंचल ओढाया था जिसने
मैं साक्षी था उस दृश्य का
एक माँ के दर्द का एहसास कराया था जिसने
माँ की बातें माँ का प्यार
माँ की ममता माँ का दुलार
वो माँ ही थी, उसका जूठा, खाया था जिसने
वो माँ ही थी उसे चलना सिखाया था जिसने
उस माँ को उसने भुला दिया
उसके निश्छल प्यार का ये सिला दिया
के छाले भी पाँव के उसके नहीं सूखते ...!!
और उस बेटे के प्यार की इन्तहा देखिये
उसकी माँ नहीं रोती...लोग उसे देख के रोते हैं !
-विकास सिंह
कल अपने बेटे को आंचल ओढाया था जिसने
मैं साक्षी था उस दृश्य का
एक माँ के दर्द का एहसास कराया था जिसने
माँ की बातें माँ का प्यार
माँ की ममता माँ का दुलार
वो माँ ही थी, उसका जूठा, खाया था जिसने
वो माँ ही थी उसे चलना सिखाया था जिसने
उस माँ को उसने भुला दिया
उसके निश्छल प्यार का ये सिला दिया
के छाले भी पाँव के उसके नहीं सूखते ...!!
और उस बेटे के प्यार की इन्तहा देखिये
उसकी माँ नहीं रोती...लोग उसे देख के रोते हैं !
-विकास सिंह
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