Saturday, February 2, 2013


"गिरते-गिरते एक दिन आखिर सँभलना सीख लिया ...
ज़िंदगी में वक़्त की रस्सी पे चलना सीख लिया ..
पहले बादल नहीं थे फिर रेत ही रेत मिली
हम भी काफिर थे हमने रेत को सोने में बदलना सीख लिया "
-विकास सिंह 

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