वाह
सियासत ,आह सियासत
देश की हर इक राह सियासत
दिन सियासत
रात सियासत
खाली
तो बिन बात सियासत
रंग
सियासत ढंग सियासत
लोकतंत्र
हर अंग सियासत
लहू
के हैं दो रंग सियासत
बदी
का है सत्संग सियासत
जमीदोज
है उनपे सियासत
सर
पे चढ़ें हैं उनपे सियासत
मई
सियासत जून सियासत
हर
गली हर खून सियासत
सज़ायाफ्ता
दिल पे सियासत
टूटी
हर मंज़िल पे सियासत
निकला हर एक सुर सियासत
निकला हर एक सुर सियासत
हर
कला हर गुण सियासत
कर्म सियासत धर्म सियासत
असुर है ये बेशर्म सियासत ..
हाय सियासत हाय सियासत !!
-विकास सिंह
असुर है ये बेशर्म सियासत ..
हाय सियासत हाय सियासत !!
-विकास सिंह
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