मेरा इलाहाबाद मुझसे कहता
है,
के भले
सूरज सो जाए
पर ,
तू अपने जज्बे
को जगाये रख
!
के भले रात
अँधेरी आये ,
तू अपने हौंसले
को बढाए रख
!
याद रख इतिहास
गवाह है ,
के हर उस
इलाहाबादी ने ,
इसे गौरव दिलाया
है जिसने,
अपने जज्बे और अपने
सपने.
के लिए खुद
को तपाया है
!
तू भी उसी
बुलंदी पे पहुंचेगा
रख यकीन खुद
पे
मेरा इलाहाबाद मुझसे कहता
है !!
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